History of Maharana Pratap in Hindi .महाराणा प्रताप का इतिहास



History of Maharana Pratap in Hindi

महाराणा प्रताप का इतिहास


महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) उदयपुर के मेवाड़ में सिसोदिया राजपूत राजवंश के महान राजा थे। महाराणा प्रताप सिंह  अपनी वीरता और दृढ़ प्रण के लिए अमर माने जाते हैं। भारत के इतिहास में महाराणा प्रताप  एक ऐसे राजा थे जिन्होंने मुगल बादशाह अकबर के सामने कभी अपना सिर नहीं झुकाया।महाराणा प्रताप ने भगवान एकलिंग की सौगंध खाकर प्रतिज्ञा ली थी कि वह कभी अकबर को अपना राजा नहीं स्वीकार करेंगे।भारत का शूरवीर एवं महान देशभक्त महाराणा प्रताप का नाम इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से अंकित है। महाराणा प्रताप अपने युग के महान  और उदार व्यक्ति थे। उनके गुणों के कारण सभी उनका सम्मान करते थे। आज भी महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) का नाम भारतीयों के लिये प्रेरणा स्रोत है। राणा प्रताप का स्वाभिमान  भारत माता की पूंजी है। राणा प्रताप की देशभक्ति, पत्थर की अमिट लकीर है। ऐसे पराक्रमी भारत मां के वीर सपूत महाराणा प्रताप को राष्ट्र का शत्-शत् नमन।


History of Maharana Pratap in Hindi .महाराणा प्रताप का इतिहास
History of Maharana Pratap in Hindi .महाराणा प्रताप का इतिहास


महाराणा प्रताप (Maharana Pratap)


  • मेवाड़ के महान राजा महाराणा प्रताप अपनी वीरता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्द हैं। एक ऐसा महान राजपूत राजा, जिसने विदेशी मुगलों की दासता स्वीकार करने की बजाय जंगलों में रहना पसंद किया उन्होंने देश की स्वाधीनता, मर्यादा और धर्म के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया।
  • हम में से कितने लोग हैं जो महाराणा प्रताप के त्याग और संघर्ष को को नहीं जानते। महाराणा प्रताप के समय दिल्ली पर तुर्क सम्राट अकबर का शासन था, जो भारत के सभी राजा-महाराजाओं को अपने अधीन करके, मुगल साम्राज्य की स्थापना कर पूरे हिन्दुस्तान में इस्लामिक प्रसार करना चाहता था। अकबर ने हर तरह से भारत को गुलाम बनाने की कोशिश की परन्तु 30 वर्षों के लगातार प्रयास के बाद भी अकबर ,महाराणा प्रताप को बंदी बना पाया।
  • सवाल यह है कि महानता का अर्थ क्या है? अकबर हजारों लोगों की हत्या करके भी महान है और महाराणा प्रताप  हजारों लोगों की जान बचाकर भी महान नहीं कहलाते हैं। वास्तव में बात यह है कि , हमारे देश का इतिहास कम्युनिस्टों और अंग्रेजों के द्वारा लिखा गया है।जिन्होंने भारत पर अत्याचार किया ,आक्रमण करके उसे लूटा,धर्मांतरण किया, उनकी नजरो में वो लोग महान हैं।


जन्म स्थान (Birth Place)

  • महाराणा प्रताप  (Maharana Pratap) का जन्म 9 मई, 1540 ईस्वी को राजस्थान के कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ था। हिन्दी तिथि के अनुसार, उनकी जयंती ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। 
  • उनके पिता का नाम  महाराजा उदयसिंह और माता राणी जयवंता बाई थीं। वे राणा सांगा के पौत्र थे। महाराणा प्रताप के बचपन का नाम "कीका" था। 


आरंभिक जीवन (Earlier Life)


  •  महाराणा प्रताप बचपन से ही बहुत बुद्धिमान और तेजस्वी बालक थे। उनको तलवार चलाने का प्रशिक्षण बचपन से ही दिया जाने लगा क्योंकि उनके पिता उन्हें अपनी तरह कुशल योद्धा बनाना चाहते थे | बालक प्रताप ने कम उम्र में ही अपनी वीरता का परिचय दे दिया था |वह खेल खेल में ही एक समूह बना लेते और बच्चो के साथ तलवारबाजी का अभ्यास करने लग जाते। जिससे वो हथियार चलाने में निपुण होते गये| धीरे धीरे समय बीतता गया और वह एक कुशल योद्धा के रूप में प्रस्तुत हुए।
  •  महाराणा प्रताप का वजन 110 किलोग्राम और कद साढ़े सात फुट था| उनके सुरक्षा कवच 72 किलोग्राम का और भाला 80 किलो का था| कवच, भाला, ढाल और तलवार इन सब को मिलाये तो वे युद्ध में 200 किलोग्राम से भी ज्यादा वजन के साथ लड़ते थे| आज भी महाराणा प्रताप का कवच, तलवार, भाला, ढाल आदि वस्तुएं उदयपुर राजघराने के संग्रहालय में रखे है|



पारिवारिक जीवन (Family life)

  •  राणा प्रताप ने अपने जीवन में कुल ११ शादियाँ की थी। उनकी पहली पत्नी अजाब्दे पंवार थी। पहली पत्नी से उन्हें दो संतान थी -अमरसिंह और भगवानदास।
  • प्रताप के पिता राणा उदय सिंह की महारानी जयवंता के अलावा और भी पत्नियाँ थी, जिनमे रानी धीर बाई उदय सिंह की प्रिय पत्नी थी | रानी धीर बाई चाहती थी कि उनका पुत्र जगमाल उत्तराधिकारी बने |लेकिन प्रजा प्रताप को ही अपना राजा मानती थी। तब मेवाड़ के विश्वासपात्र चुंडावत राजपूतो ने जगमाल के सिंहासन पर बैठने को विनाशकारी मानते हुए जगमाल को राजगद्दी छोड़ने को बाध्य किया

History of Maharana Pratap in Hindi .महाराणा प्रताप का इतिहास
History of Maharana Pratap in Hindi .महाराणा प्रताप का इतिहास

  • जगमाल सिंहासन नहीं छोड़ना चाहता था।  इसके विरोध में आकर जगमाल अकबर के साथ मिल गया और उसके बदले उसको जहाजपुर की जागीर सौगात में मिल गयी |
  • इस दौरान राजकुमार प्रताप  मेवाड़ के 54वे शासक के रूप में आए | महाराणा प्रताप के समय, दिल्ली पर अकबर का शासन था और अकबर की निति हिन्दू राजाओ में फूट डाल उन्हें अपने नियन्त्रण में लेना था | महाराणा प्रताप का प्रथम राज्याभिषेक  1572 में गोगुन्दा में हुआ , लेकिन विधानस्वरूप उनका  द्वितीय राज्याभिषेक 1572 . में ही कुुंभलगढ़़ दुुर्ग में हुआ। उस वक़्त उनकी आयु  27 वर्ष थी।


हल्दीघाटी का युद्ध ( जून 1576) (Haldighati yuddh)

  •  हल्दीघाटी का युद्ध भारत के इतिहास में प्रमुख है। यह युद्ध 18 जून 1576 को लगभग 4 घंटों के लिए लड़ा गया , यह युद्ध मेवाड के राजा और मुगलों के बीच हुआ था। महाराणा प्रताप की सेना का नेतृत्व एक मात्र मुस्लिम सरदार हाकिम खान सूरी ने किया और मुग़ल सेना का नेतृत्व मानसिंह और आसफ खाँ ने किया इस युद्ध में महाराणा प्रताप के 20,000 राजपूतों का सामना, अकबर की 80,000 मुग़ल सेना के साथ हुआ। 
  •  कई मुश्किलों का सामना करने के बाद भी प्रताप ने हार नहीं  मानी और उनकी वीरता के कारण आज भी उनका नाम इतिहास के पन्नो में अमर है।महाराणा  प्रताप ने अपने वंश को कायम रखने के लिये संघर्ष में जुटे रहे और अकबर के सामने घुटने नहीं टेके।जंगल-जंगल भटकते हुए तृण-मूल घास-पात की रोटियों में गुजर-बसर कर पत्नी बच्चे को विकराल परिस्थितियों में अपने साथ रखते हुए भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी। 
  • राणा प्रताप की वजह से ही राजपूतो का नाम इतिहास के पन्नो में चमक रहा है। उन्होंने अपनी मातृभूमि को तो कलंकित किया और परतंत्र होने दिया विशाल मुग़ल सेना के प्रताप ने छक्के छुड़ा दिए। मेवाड़ पर जो अकबर का का कब्जा था ,उसका अंत 1585 . में हुआ।
  • महाराणा प्रताप की वीरता के साथ साथ उनके घोड़े चेतक की वीरता भी विश्व में प्रसिद्द है| चेतक बहुत समझदार और वीर घोड़ा था ,जिसने 26 फुट गहरे दरिया से कूदकर महाराणा प्रताप की रक्षा की थी हल्दीघाटी में आज भी चेतक का मंदिर बना हुआ है

History of Maharana Pratap in Hindi .महाराणा प्रताप का इतिहास
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मृत्यु (Death)

  • अकबर से विजय के बाद वह को पुनः राज्य को सँभालने में लग गए ,परंतु दुर्भाग्य से ग्यारह वर्ष बाद 19 जनवरी 1597 में  नई राजधानी चावंड में अपना देह को छोड़ सदैव के लिए अमर हो गए।


अकबर की प्रतिक्रिया -महाराणा प्रताप की मृत्यु पर 

  • अकबर और  महाराणा प्रताप आपस में शत्रु थे ,पर उनकी लड़ाई कोई व्यक्तिगत नहीं थी।  अपने सिद्धांतों और मूल्यों की वजह से शत्रुता थी। अकबर अपना क्रूर साम्राज्य को बढ़ाना चाहता था , जब की प्रताप अपनी  मातृभूमि की स्वाधीनता के लिए लड़ रहे थे। 
  • महाराणा प्रताप की मृत्यु की खबर सुन अकबर को बहुत ही दुःख हुआ क्योंकि दिल से वो महाराणा प्रताप के गुणों का कायल था और अकबर यह भी जनता था की महाराणा जैसा शूरवीर इस धरती पर कोई नहीं है। यह समाचार पाकर अकबर  मौन हो गया और उसकी आँख में आंसू गए।











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धन्यवाद 

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Milan Tomic

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